बुधवार, 14 दिसंबर 2011

Conditions apply !!

अब भी
चौराहों पर बालक खड़े हैं
भूखे

अब भीघूँघट में मुखड़ा छुपाये
पनिहारिन  दूर तक जाती है

कोई पलक टकटकी लगाये
आज भी किसी का बाट जोहती  है

आसमान का नीला फलक
आज भी
अपनी और उठने वाली नजरो से
बिंध जाता है

आज जबकि "सब है" का दम भरते
बेदम पड़े कुछ पस्त आम
बिलकुल चूस कर फेक दिए गए है
चारो तरफ है इश्तिहार
और नीचे छपा है-
Conditions apply !!!

13 टिप्‍पणियां:

  1. सशक्त लेखनी का शानदार नमूना।

    सादर

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  2. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  3. कल 16/12/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. Sahi kaha har jagah Conditions Apply hai....

    Zindagi bhi sukhmay ho sakti hai...terms n conditions apply

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  5. बहुत खूब! बहुत सुंदर प्रस्तुति...

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  6. सुन्दर बिम्ब प्रयोग.... अच्छी रचना...
    सादर बधाई...

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  7. कृपया टिपण्णी के लिए वर्ड वेरिफिकेशन हटा दीजियेगा ..टिपण्णी लिखने में दिक्कत होती है....सादर

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  8. सशक्त खूबसूरत लेखनी की बढ़िया प्रस्तुति,...बधाई ....

    मेरी नई पोस्ट की चंद लाइनें पेश है....

    नेता,चोर,और तनखैया, सियासती भगवांन हो गए
    अमरशहीद मातृभूमि के, गुमनामी में आज खो गए,
    भूल हुई शासन दे डाला, सरे आम दु:शाशन को
    हर चौराहा चीर हरन है, व्याकुल जनता राशन को,

    पूरी रचना पढ़ने के लिए काव्यान्जलि मे click करे

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  9. जाने कहाँ से आपके ब्लॉग तक पहुंची...

    बहुत अच्छा लेखन...

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